भवनों से उतर के शेरावाली आई है

भवनों से उतर के शेरावाली आई है,
भक्तो को ख़ुशी की सौगात देने आई है,
करलो दीदार माँ का करलो जी,
आई शेर पे सवार होक मैया जी,

ग़ज ग़ज माँ के जयकारे लगाओ जी,
नच नच के आज मैया को रिजाओ जी,
थक नहीं जाना कही बीच राहो में,
आई शेर पे सवार होक मैया जी,

जब होगी माँ प्रशन सबकी बात बन जाएगी,
चरणों से माँ अपने सबको लगाई,
सच्चे मन से आज माँ को ढया लो जी,
आई शेर पे सवार होक मैया जी,

मन की मुरादे पा ले मौका नहीं चूकना,
खो न जाए कही ये पर तू न रुकना,
खुशियों से झोली अपनी तुम भरलो,
आई शेर पे सवार होक मैया जी,

भरे है भंडारे माँ के झोली भरवालो जी,
सोये है नसीब जिनके आज जगा लो जी,
दास ये अजीत ये बोले सबसे,
आई शेर पे सवार होक मैया जी,