मेरा कुज भी नहीं मेरा कुज भी नहीं सब तेरा तेरा दातिए,

असि कुज भी नहीं कुज भी नहीं कुज भी नहीं दातिए.
सब तू ही तू सब तू ही तू एह दातिए,
तेरे दर ते झुक्दे देवी देव ते शेरावालिये,
मेरा कुज भी नहीं मेरा कुज भी नहीं सब तेरा तेरा दातिए,

तू चावे ता राजिये नु भी दर दर भीख मंगा देवे,
तेरी किरपा मंग तेया नु भी तख्ता ऊठे बिठा देवे,
अकबर वर्गे राजे तेरे तरल करदे दातिए,
मेरा कुज भी नहीं मेरा कुज भी नहीं सब तेरा तेरा दातिए,

सूरज चन दरया धरती तेरा पानी भरदे ने,
एह अम्ब्रा दे तारे भी माँ तनु सजदा करदे ने,
तेरी किरपा दे नाल गूंगे गल्ला करदे दातिए,
मेरा कुज भी नहीं मेरा कुज भी नहीं सब तेरा तेरा दातिए,

कई खांडे ने राज के रोटी कई भूखे ही सोन्दे ने,
कई कमान दे लाख करोडा कई कखा नु रोंदे ने,
सुरज शाम आते लकी बस हूँ एही कहन्दे दातिए,
मेरा कुज भी नहीं मेरा कुज भी नहीं सब तेरा तेरा दातिए,