कृष्ण गोविंद गोविंद गोपाल नन्दलाल

कृष्णा गोबिंद गोबिंद गोपाल नन्दलाल,

हम प्रेम नगर की बंजारन,
जप तप और साधन क्या जाने,
हम श्याम के नाम की दीवानी,
व्रत नेम के बंधन क्या जाने,
हम बृज की भोरि गवालनियाँ,
ब्रह्म ज्ञान की उलझन क्या जाने,
ये प्रेम की बातें हैं ऊधो,
कोई क्या समझे कोई क्या जाने,
मेरे और मोहन की बातें या मैं जानू या वो जाने,


मैंने स्याम सुंदर संग प्रीत करी,
जग में बदनाम मैं होय गई,
कोई एक कहे कोई लाख कहे,
जो होनी थी सो तो होय गई,
कोई साँच कहे कोई झूठ कहे,
मैं तो श्याम पिया की होये गई,
मीरा के प्रभू कब रे मिलोगे,
मैं तो दासी तुम्हारी होये गई

पंडित देव शर्मा
श्री दुर्गा संकीर्तन मंडल
रानिया, सिरसा
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