खीसा कफ़न नु नहीं लगना

सोने दे भावे महल बना ले,
हीरे मोती नाल जड़ा ले,
धर्म राज दे यमा ने तनु खाली कर के कड़ना,
खीसा कफ़न नु नहीं लगना,

रब दियां रहा नाल पाप करि जाना है,
पापा वाली पौड़ी उते आपे चढ़ी जाना है,
रब दे वादे भूल गया तू दुनिया दे विच रूल गया तू,
चो बन्दियाँ ने मोदा लाके सीवया दे तक छड़ना,
खीसा कफ़न नु नहीं लगना,

महल मीनारे किसे कम नहीं आने,
मगरो कबूरता ने आने पौने आ,
मालिक ने भजिया कर्म कमाउन लई,
नहियो पलयो होर कमाउन लाई,
जिह्ना मर्जी जोर लगा ले जो घड्या सो भजना,
खीसा कफ़न नु नहीं लगना,

कागजा दे नोटा उते मान नहियो करी दा,
दसदा गोरया वाला रब कोलो डरी दा,
तू है कच दे खडोने वरगा चार दिन जग ते परोने वरगा,
एह ज़िंदगी दा तुम्बा तेरा तार बिना नहीं भजना,
खीसा कफ़न नु नहीं लगना,