एह मेरे गुरु जी एह मेरे मालिक

एह मेरे गुरु जी एह मेरे मालिक दात बस यही मांगू तुझसे,
तेरी ही राह चलता राहु सदा,
मुझे ऐसी जनूनी बंदगी दे दे,
तेरी रजा में राजी रहे सदा,
ऐसी रूब रूह रोशनी दे दे,

दुःख हो तो न कभी गिल्ला करू,
मुश्किलों से ना कभी हिला करू ,
सुख मिले जब किरपा से तेरी मालिक तुझे कभी न भुला करू,
हर शह में देखलु नूर तेरा काबिल ऐसी मुझे निगहा देदे,
एह मेरे गुरु जी एह मेरे मालिक दात बस यही मांगू तुझसे,

गम में पराये कभी न हसा करू,
दूजे की ख़ुशी से ना जला करू,
कर पाउ अगर मदत सब की,
दर्द न दू कर सकू तो भला ही करू,
खुदा को देख लू वसा बरसु काबिल मुझे ऐसी निगाह देदे,
एह मेरे गुरु जी एह मेरे मालिक दात बस यही मांगू तुझसे,

माया के जाल में ना फसा करू,
सच की राह से ना हटा करू,
बक्शे है फ़र्ज़ जो दाता सदा नेक नियत से उन्हें अदा करू,
खुद  को ना मानु तुझसे जुड़ा मेरे जेहन को ये यकीन देदे,
एह मेरे गुरु जी एह मेरे मालिक दात बस यही मांगू तुझसे,
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