नेक रहा पे चलना सिखा दे

नेक रहा पे चलना सिखा दे भटके जो राह पे राह दिखादे,
भागियाँ में है फूल हज़ार हर इंसान में हो वैसा प्यार,

माया में जिनका मन ये डूबा क्या उनको फल मिले भजन का,
काम नही जो आये किसी के मोल है माँ क्या इसे धन का,
चूर धमंड में सोये है जो आके मात उन्हें जगा दे,
नेक रहा पे चलना सिखा दे भटके जो राह राह दिखादे,

तू ने चंदा सूरज बनाये तूने बनाये मैया इंसा,
जाती धर्म में अज्ञानी उलझाए फिर वो बांये हिन्दू मुसलमा,
नफरत की ये आग भुजा तू प्रेम की गंगा बहा दे
नेक रहा पे चलना सिखा दे भटके जो राह राह दिखादे

झूठ कपट से दिन जो बिताये,
पापी कभी नहीं वो फल ते,
देती तू साथ जो माता सतह पथ पर जो भक्त चलते है,
भक्ति की क्या  है शक्ति सबको तू माँ आज बता दे,
नेक रहा पे चलना सिखा दे भटके जो राह राह दिखादे,
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