भव से वो ही पार हुआ

मां हमको देती है दर्शन,
ये मां का है एहसां,
गया जो माता के दर,
भव से वो ही पार हुआ.....

की है कुबुल मैंया नें,
जो भी मांगी दुआ,
गया जो माता के दर,
भव से वो ही पार हुआ.....

ये जो हवाएं हैं,
मां के भवन से आती हैं,
बुलाया मां ने हमें,
संग पैगाम ये लाती हैं,
मिलें हैं मां के भवन में,
हमको दोनों जहां,
गया जो माता के दर,
भव से वो ही पार हुआ....

वो ही है शारदा मां,
वो ही काली माता है,
उन्हें ही सारा ये जग,
दुर्गा मां बुलाता है,
मिला है नाम से मां के,
जो भी मांगा गया,
गया जो माता के दर,
भव से वो ही पार हुआ....

है मां की रहमत ये,
झोली में खुशियां आयी हैं,
झुकाया सर जो फिर,
कृपा भी तो पायी है,
नसीब जाग गया है,
अपना सोया हुआ,
गया जो माता के दर,
भव से वो ही पार हुआ....

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