झोलियाँ भर देती

जो आये... जो आये तेरे दरबार,
झोलियाँ भर देती,
कोई शीश... कोई शीश निवाये इक बार,
झोलियाँ भर देती,

जो श्रद्धा से चल के आये,
भाव भक्ति से फूल चढा़ये,
पान सुपारी ध्वजा नारियल,
मां अपनी को भेंट चढ़ाये,
मां रीझे... मां रीझे उसके भाव,
झोलियाँ भर देती
जो आये......

मां अम्बे तेरी शक्ति न्यारी,
जिस को पूजे दुनिया सारी,
भक्तों की तू है हितकारी,
पापियों को भी तारणहारी,
तू करुणा.... तू करुणा की अवतार
झोलियाँ भर देती
जो आये...........

तेरा रुप माँ भोला भाला,
आखें जैसे अमृत प्याला,
भक्तों को वरदान तू देती,
शरणागत की चिन्ता हर लेती,
तेरे इसी.... तेरे इसी रुप बलिहार
झोलियाँ भर देती
जो आये...........

जब जब कोई भक्त पुकारे,
माँ तू आन के विपदा टारे,
भक्तन की होने सहाई,
अष्टभुजी माँ सिंह पे आई,
"अदिति" को.... "अदिति" को ये विश्वास
झोलियाँ भर देती
जो आये... जो आये तेरे दरबार,
झोलियाँ भर देती
कोई शीश... कोई शीश निवाये इक बार,
झोलियाँ भर देती

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