मेरे मन के अंध तमस में

मेरे मन के अंध तमस में ज्योतिर्मय उतारो,
जय जय माँ जय जय माँ जय जय माँ जय जय माँ,

कहाँ यहाँ देवों का नंदन,
मलयाचल का अभिनव चन्दन
मेरे उर के उजड़े वन में करुणामयी विचरो,
मेरे मन के अंध तमस में...

नहीं कहीं कुछ मुझ में सुन्दर,
काजल सा काला यह अंतर,
प्राणों के गहरे गह्वर में ममता मई विहरो,
मेरे मन के अंध तमस में...

वर दे वर दे, वींणा वादिनी वर दे,
निर्मल मन कर दे, प्रेम अतुल कर दे
सब की सद्गति हो, ऐसा हम को वर दे,
मेरे मन के अंध तमस में,

सत्यमयी तू है ज्ञानमयी तू है,
प्रेममयी भी तू है हम बच्चो को वर दे,

सरस्वती भी तू है महालक्ष्मी तू है,
महाकाली भी तू है हम भक्तो को वर दे,