तेरे कारण मैं साई जोगन बनी

तेरे कारन मैं साईं जोगन बनी,
इतंजार के आने के आये नही,
तेरी राहो में पलके बिशी रह गई,
तेरे कारन मैं साईं जोगन बनी,

साईं तेरे बिना प्राण तन में रहे,
ऐसे पापी है के अब तक ये निकले नही,
आया तूफ़ान जो जो सिम्बला नही,
राह मझधार में ही पड़ी रह गई,
तेरे कारन मैं साईं जोगन बनी,

मैंने सोचा की चिठ्ठी लिखू साईं को,
एसा न पौंच पर कागज नही,
जब दिखा आँखों की शाही का दरिया भरा,
पर कलम मेरी फिर भी रुकी रह गई थी,
तेरे कारन मैं साईं जोगन बनी,

प्रीत साईं की मन में वसे है मेरे,
थोडा हम को अकेले ना आया रहम,
जो कर्मो से शिर्डी से आये नही आग मन में लगी की लगी रह गई,
तेरे कारन मैं साईं जोगन बनी,
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