कान्हा गिरी छुवारे छोले

कान्हा गिरी छुवारे छोले पर राधा न बोले,
कान्हा आगे पाशे डोले पर राधा न बोले.

तने नै चुनड़ी लय दू राधे बोले गी के नाम,
चुन्द का गोटा बोले पर राधा न बोले,
कान्हा गिरी छुवारे छोले पर राधा न बोले,

तने चोली नई सिल्वा दू राधा बोले गी के ना,
चोली की डोरी बोली पर राधा न बोले,
कान्हा गिरी छुवारे छोले पर राधा न बोले,

तेरा दमन सीमा  दू राधा बोले गी की ना,
दामन की झालर बोले पर राधा न बोले,
कान्हा गिरी छुवारे छोले पर राधा न बोले,

तने प्याल गराडू राधा बोले गी के ना,
प्याल की शम शम बोले पर राधा न बोले,
कान्हा गिरी छुवारे छोले पर राधा न बोले,

तने बंसी जो सीखा दू राधा बोले गी के ना,
जो बंसी मने सिखावे राधा तेरी हो जावे,
जो बंसी मने सिखावे तनाव सिंह भी तेरे गुण गावे,
कान्हा गिरी छुवारे छोले पर राधा न बोले,
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