मेरी औकात कुछ नही है

मेरी औकात कुछ नही है मेरी औकात कुछ नही है,
साईं ने निभाया मुझको मुझमे बात कुछ नही है,
मेरी औकात कुछ नही है

मैं हर एक गली गुजर गया,
मैं हर जगह से गुजर गया,
तुझे क्या खबर तेरे इश्क में,
मैं कहा कहा से गुजर गया,
साईं ने निभाया मुझको मुझमे बात कुछ नही है,
औकात कुछ नही है मेरी.......

मैं न हरगिज इधर उधर जाऊ गा,
मैं जिधर जाऊ गा तेरा कहलाऊ गा,
भीख दोगे इधर से उधर जाऊ गा,
वर्ना यही चरणों में मर जाऊ गा,
साईं ने निभाया मुझको मुझमे बात कुछ नही है,
औकात कुछ नही है मेरी.......

जिधर भी नजर ये मेरी जाये गी,
साईं की दया से झोली भर जाएगी,
एधर आने वाली इधर जायेगे,
ये कहते हुए साईं के दर आये  गी,
साईं ने निभाया मुझको मुझमे बात कुछ नही है,
औकात कुछ नही है मेरी.......

हमसर को अपना बना लिया,
मेरे साईं ने मुझपे कर्म किया,
अब क्या कहू दुनिया से मैं मेरे साईं ने मेरा दामन भर दिया,
साईं ने निभाया मुझको मुझमे बात कुछ नही है,
औकात कुछ नही है मेरी.......
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