कुंज बिहारी रास रचैया

कुंज बिहारी रास रचैया,
गोबर्धन गिरधारी,
सुनले अर्ज हमारी,
कान्हा सुनले टेर हमारी।।

आंख मिचोली हमें न भावे,
काहे दर्शन को तरसावे,
बेगि हरो सब पीड़ा मन की
आश मोहे तेरे दर्शन की,
चक्र सुदर्शन लेके आजा,
फिर से मोहन रास रचा जा,
सुनले टेर हमारी।।

छोड़ गया बृंदावन जब से,
भूल गया हम सबको तब से,
यमुना तट पर रास रचाके,
मोहान मुरली मधुर बजाके,
गैया चराने की आजा रे,
मोर पपीहा तुम्हे पुकारे,
आजा रे बनवारी।।

गीतकार/गायक-राजेन्द्र प्रसाद सोनी
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