क्या पाया है दर तेरे आकर

क्या पाया है दर तेरे आकर,
तू जाने या मैं जानूँ,
मिलता है क्या तुमको रिझा कर,
तू जाने या मैं जानूँ।

सब चाहते हैं जीत जहाँ में,
किसको पसंद यहाँ हारना,
क्या जीता हूँ खुद को हरा कर,
तू जाने या मैं जानू,
मिलता है क्या तुमको रिझा कर,
तू जाने या मैं जानूँ।

अपनी हस्ती कर दी समर्पित,
तेरे नाम की ज्योत में,
निखरा हूँ मैं खुद को बुझा कर,
तू जाने या मैं जानू
मिलता है क्या तुमको रिझा कर,
तू जाने या मैं जानूँ।

प्रेम समर्पण की है पूँजी,
तुझपे लुटा दी सांवरे,
कितना धनी हूँ सब कुछ लुटा के,
तू जाने या मैं जानू
मिलता है क्या तुमको रिझा कर,
तू जाने या मैं जानूँ।

सोनू करे बस चर्चा तुम्हारी,
और ना गुण कोई ख़ास है,
काबिल हुआ हूँ गुण तेरे गाकर,
तू जाने या मैं जानू
मिलता है क्या तुमको रिझा कर,
तू जाने या मैं जानूँ।
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