बंसी वाले तेरा दरबार रे

मैं तो सींचूगी सुबह और श्याम रे
बंसी वाले तेरा दरबार रे......-2

मैं गंगा जल भर लाई हूँ...–3
बंसी वाले को नहलाने आई हूँ
मैं तो सींचूगी सुबह और श्याम रे......


घिस-घिस चंदन भरी कटोरी....–3
मुरली वाले को तिलक लगाउंगी
मैं तो सींचूगी सुबह और श्याम रे......


मैं चुन-चुन कलियाँ लाई हूँ....–3
बंसी वाले को सजाने आई हूँ
मैं तो सींचूगी सुबह और श्याम रे......


पीला पीतांबर, टसर की धोती....-3
बंसी वाले को पहनाने आई हूँ
मैं तो सींचूगी सुबह और श्याम रे......

छप्पन भोग छत्तीसों व्यंजन...-3
मैं भोग लगाने आई हूँ
मैं तो सींचूगी सुबह और श्याम रे......
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