जनम लियो वाने मरणो पड़सी

आया है सो जाएगा,
राजा रंक फ़कीर,
कोई सिंघासन चढ़ चले,
कोई बंध जात ज़ंजीर।
जनम लियो वाने मरणो पड़सी,
मौत नगारों सिर फूटे रै,
लाख उपाय करों मन कितना,
बिना भजन नहीं छूटे रै।

जब राजा को आयो झूलनों,
प्राण पलक में छूटे रै,
हिचकी हाल हत्तीडो लागे,
नाड़यां तड़ा तड़ टूटे रै,
जनम लियो वाने मरणो पड़सी।

भाई रै बंधू थारो कुटुंब कबीलो,
राज जी रुठ्या सब रूठे रै,
एक पलक में प्रलय हो ज्यासी,
घाल रथी में तन्ने कुटे रै।
जनम लियो वाने मरणो पड़सी।

जीवड़ा ने जब जमड़ा चाले,
क्रोध कर कर फूटे रै,
गुरजारी घमसान मचावें,
तुरत ताळवो फूटे रै,
जनम लियो वाने मरणो पड़सी।

जीवड़ा में जमड़ा नरक में डाले,
कीड़ा कागला चूटें रै,
भुगतलो जीव भजन बिना भाई,
जमड़ा जुगों जग कूटे रै,
जनम लियो वाने मरणो पड़सी।

थारी चतुराया में धूळ पड़ेली,
करमडा रा काठा थारा फुटेला रै,
करमा रो हीण कीचड़ में गलियों,
बिना भजन नहीं छूटे रै,
जनम लियो वाने मरणो पड़सी।

राम सुमर ले सुखरत कर ले,
मोह बंधन तब टूटे रै,
कहत कबीर सुख चावे रे जीवड़ा तू,
राम नाम धन लूटे रै।
जनम लियो वाने मरणो पड़सी।
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