अखियाँ निष् दिन बेहती जाए

अखियाँ निष् दिन बेहती जाए
इक पल चैन न पाए श्याम बिन
देखे बिना गबराए,
निष् दिन बेहती जाए

दामनी की दमकन से छीन छीन विरहा गाज गिराए,
घन की गर्जन सुन व्याकुल व्रिग सा वन ऋतू आये
निष् दिन बेहती जाए

गिन गिन तारे गई आवनी जब से नैन मिलाये
निर्मोही सु नेहा लगा कर क्यों मुझको तडपाये
निष् दिन बेहती जाए

राह तकत अखियाँ पथराई नैनन चैन ना आये
दर्श दीवाने ये मन माने,
नैना नीर बहाए,
निष् दिन बेहती जाए

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