कान्हा बेदर्दी है, राधा खत लिखती हैं

कान्हा बेदर्दी है, राधा खत लिखती हैं ॥
जब से गये तुम मथुरा को, भूल गए तुम राधा को ॥
तेरी जुदाई ये कान्हा ॥ अब सही ना जाती है
अब तो आजा मोहन तेरी याद सताती है ॥
तेरी याद सताती है, राधा खत लिखती हैं ॥

तेरी याद में मोरनी रोये, पंख ये फैलाये ॥
भूखे डोले गईया बछङे, घास नहीं खाये ॥
अब तो आजा कान्हा तेरी, गायें भटकती है
अब तो आजा मोहन तेरी याद सताती है॥
तेरी याद सताती है राधा खत लिखती हैं ॥

जिनके साथ तुम खेले मोहन, लट्ठ मार होली ॥
दुःखी हो गई वो गुजरिया, ग्वलों की टोली ॥
तेरे बिना ये कुँज गलियां, वीरानी लगती है
अब तो आजा मोहन, तेरी याद सताती है ॥
तेरी याद सताती है, राधा खत लिखती हैं ॥

अब तो इस डगरे में ना कोई, ग्वालन आती है ॥
दही बेचने वाली कोई नजर न आती है॥
तेरे बिना ओ कान्हा सब, गोपियां रोती है
अब तो आजा मोहन तेरी याद सताती है ॥
तेरी याद सताती है, राधा खत लिखती हैं

आजा मोहन प्यारे क्यूं तुम, देर लगाते हो ॥
अपनी राधा रानी को तुम, क्यूँ तङपाते हो ॥
तेरी याद में मैया, दिन रात तङपती है
अब तो आजा मोहन, तेरी याद सताती है ॥
तेरी याद सताती है, राधा खत लिखती हैं ॥

कान्हा बेदर्दी है, राधा खत लिखती हैं
तेरी याद सताती है, राधा खत लिखती हैं
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