सावरिया मन भाये गयो री

सावरिया मन भाये गयो री,
सावरिया मन भाये गयो री,
सांवरिया मेरो सांवरिया
सावरिया मन भाये गयो री

तेरी प्रीत ने हम को क्या ना दिखाया,
हां बदनाम करके जगत में हसाया
खिची आई बेसुध ना समजा
लवो पे लगा बांसुरी जब बुलाया,
अदाओं भरी टेडी चितवन जो देखी
दिलो जान लुटा जब जरा मुसकुराया
सुना भोली भाली को प्रीत की भाटी,
कहा चल दिए जाने क्या दिल में आया,
तेरी खोज में जिस मो जा न मैं भूली
पता पता में ढूंडा पता कुछ ना पाया
सब रिश्ते दिलो जान तेरे हाथ बेचे,
बहुत कुछ गवाया न कुछ हाथ
मजा खूब श्याम वाह तेरी उल्फत
ना घर का रखा और न अपना बनाया,
सावरिया मन भाये गयो री

पेहना पट प्रीत मनोहर जो उसे बार बार फेह्राना न
बिन गुलाब गुलाम बनाना था
यदि प्रीत की रीत निभाना न था,
सावरिया मन भाये गयो री
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