हम को आना नील कंठ तेरी याद सता रही है

कर भोले कमाल सावन की रुत जा रही है,
हम को आना नील कंठ तेरी याद सता रही है,
हमको बड़ा रुला रही है,

हरिद्वार से भोले तेरी कावड लेकर आता था
नील कंठ मैं नंगे नंगे पाँव चड जाता था,
कब होगा सब पेहले जैसा मन में आ रही है,
हम को आना नील कंठ तेरी याद सता रही है,

हर साल ही आता मैं भोले तेरे दर्शन को
इस वार ना आ पाऊ बाबा तेरे दर्शन को
इसी बात की चिंता मुझको पल पल खा रही है
हम को आना नील कंठ तेरी याद सता रही है,

भोले नाथ किरपा करो दर्द साहा नही जाएगा
टोनी तेरे दर्शन बिन सावन में न रेह पायेगा,
बम बम की वो जय कार कानो में आ रही है,
हम को आना नील कंठ तेरी याद सता रही है,
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