अमृत की बरसे फुहार

अमृत की बरसे फुहार मैया तेरे मंदिरो में,
मांगता मुरादे संसार मैया तेरे मंदिरों में,

कभी तू स्वलियो को खाली नही मोड़ ती
किसी की भी आस की डोर नही तोड़ ती,
तेरे जैसा और कोई नही दया वां माँ,
महिमा तेरे द्वार की है सब से महान माँ,
दुखियो का होता उधार,मैया तेरे मंदिरों में,
अमृत की बरसे फुहार मैया तेरे मंदिरो में,

बाँटती हो हीरे पने मोती लाजबाब माँ,
तेरी मेहरबानियो का होता न हिसाब माँ,
बिना भेद भाव बेडा सब का तू तारती,
करे जो भरोसा उनके काज वो सवार ती,
सुनी जाती सब की पुकार,मैया तेरे मंदिरों में,
अमृत की बरसे फुहार मैया तेरे मंदिरो में,

लाखो ही भिखारी तूने किये धन वां माँ,
अंध्रो को आँखे दी को सुतो को संतान माँ
जग से निराश जो भी शरण तेरे आया माँ,
उस को ही रहमतो की दी है छाया माँ,
मिलता है निर्दोश प्यार मैया तेरे मंदिरों में,
अमृत की बरसे फुहार मैया तेरे मंदिरो में,

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