सुन भोले शंकराये

सुन भोले शंकराये सुन भोले शंकराये,
नाम जिसने तेरा लिया उसे सब कुछ दे दियां,
सुन भोले शंकराये सुन भोले शंकराये,

जटा में गंगा मुख पे चंदा गले में सर्प विराजे है,
भांग पिए करे बेल सवारी डम डम डमरू भाजे है
ओ पीताम्बर ओ त्रिपुरारी ॐ शंख जपे जग सारा,
तीनो लोक में गूंजे तेरा बम बम का जैकारा,
जिसे लागि लग्न तेरी उसे मन चाहा वर दिया,
सुन भोले शंकराये सुन भोले शंकराये,

तन में बसम लगा कर तू तो धुनि में रम जाता है,
श्मशानों  का वासी है तू काशी नाथ कहलाता है,
भोला है तू भंडारी जो मांगे वो देता है,
देकर अपने नाम की शक्ति दुःख उसके हर लेता है,
अमृत को छोड़ कर तूने विष को पी लिया,
सुन भोले शंकराये सुन भोले शंकराये,

तेरे संग रहे भुत पिशात और अगोरी रहते है,
आधी काल है अंत काल महाकाल तुझे कहते है,
ारम्पार है लीला तेरी शक्ति का कोई तोड़ नहीं,
भोले भाव से देदे तू तेरे जैसा कोई देव नहीं,
तूने खुश हो कर भोले भस्मा सुर को वर दिया,
सुन भोले शंकराये सुन भोले शंकराये,
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