नैया मंझधार में कोई न सहाई है

नैया मंझधार में कोई न सहाई है
आके सम्भालो श्याम अब ना समाई है

अपनों से धोखों का ही मिला उपहार है
अब तो पराये हुए सारे रिश्तेदार हैं
अँधियारा घोर कुछ भी देता ना दिखाई है
आके सम्भालो श्याम अब ना समाई है
नैया मंझधार में ..........

देखूं जिधर भी अब तो आफत ही आफत है
तेरे सिवा ना कोई करे जो हिफाज़त है
उम्मीदें सारी मैंने तुमसे लगाई हैं
आके सम्भालो श्याम अब ना समाई है
नैया मंझधार में ..........

देव दयालु मेरी लाज बचाओ ना
बांके खिवैय्या बेडा पार लगाओ ना
मोहित ने तुमसे मोहन अर्ज़ी लगाई है
आके सम्भालो श्याम अब ना समाई है
नैया मंझधार में ..........
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