जलाये दीप घर घर मिटाये अंधकार

दीपावली का आया है शुभ त्यौहार,
जलाये दीप घर घर मिटाये अंधकार
फुलझड़ियां जलाये खुशियां मनाये सब मिल के अपार,
जलाये दीप घर घर मिटाये अंधकार

जग मग जग मग करे जग सारा,
रोशन जग आज बागा अँधियारा,
ओहडे हो जैसे कोई दीपो की चदार,
पहने हो जैसे कोई दीपो की माला,
चमक उठा घर आँगन चमके आज हरिद्वार,
जलाये दीप घर घर मिटाये अंधकार

हर घर आँगन बनी रंगोली,
लक्ष्मी पूजन से भरे आज झोली,
संग में पूजन करे गणपति का,
हो जाए मन कामना पूरी,
हम से न रूठे लक्ष्मी माँ न गजानंद महाराज,
जलाये दीप घर घर मिटाये अंधकार

राम का पूरा हुआ वनवास तब रावण का करके संगार,
सिया राम संग प्रभु राम जी अवध नगर को लौटे थे आज,
अवध नगरियां घी का दीया जलाये हर परिवार,
जलाये दीप घर घर मिटाये अंधकार

विद्या भुधि कला की सीधी,
आज दुःख दलिदर से मिल जाए मुक्ति,
ज्ञान का इक दीप मन में जलाये,
मिठे अज्ञान हो ज्ञान की वृद्धि,
यु ही हम हर साल मनाये ये प्रकाश त्यौहार,
जलाये दीप घर घर मिटाये अंधकार
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