साँवरिया ऐसी तान सुना

साँवरिया ऐसी तान सुना,
ऐसी तान सुना मेरे मोहन, मैं नाचू तू गा ।
साँवरिया ऐसी तान सुना...

रस की धार बहे इस मन में,
अनुपम प्यार बहे इस मन में ।
तेरी याद ना विसरे इक पल,
ऐसा मस्त बना, साँवरिया ऐसी तान सुना...

भूली फिरू मैं सदन कुंजन में,
बृज की चिन में दिव्य लतन में ।
रसिकन की पग रज मस्तक की,
देवे लेख जगा, साँवरिया ऐसी तान सुना...

नयनन हो में लै अंसुअन का,
पग पग थिरक उठे जीवन का ।
हर इक प्राण पुकारे पी पी,
ऐसी तार हिला, साँवरिया ऐसी तान सुना...

हर पल तेरा रूप निहारूं,
मैं सोवत जागत तुम्हे पुकारूँ ।
हरी हरो मन की कुटलाई,
प्रेम की ज्योत जगा, साँवरिया ऐसी तान सुना...
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