विनती है तुमसे यही खाटू के नरेश

विनती है तुमसे यही खाटू के नरेश,
दरबार तेरा न छूटे न छूटे कभी ये देश,

सरहद पे रहता लाल यो मेरा तेरे सहारे तेरे सहारे,
पल पल उसकी रक्शा करना उसमे प्राण है मेरे,
दे देना सन्देश उसको खाटू के नरेश,
साथ तेरा न छूटे न छूटे कभी ये देश,
विनती है तुमसे यही खाटू के नरेश,

हुये जो शहीद उन आँखों के तारो को,
शरण में रखना शरण में रखना,
व्यर्थ ना जाये बलिदान दुनिया दुशमन को धेरे,
लगे न दिल पे ठेस फिर से खाटू के नरेश,
धीरज ना टूटे कभी ना न छूटे कभी ये देश,

भारत के जैसे वीर सुपूत और कहा रे,
तुम भारत के भाग्ये विधाता हम तो दास है  तेरे,
बदले न जग बेस कभी भी खाटू के नरेश,
टीटू खुशियां ना लुटे न छूटे कभी ये देश  
विनती है तुमसे यही खाटू के नरेश,