वज्र सा बदन अतुलित बल धामम

वज्र सा बदन, अतुलित बल धामम
हे अंजनीसुत तेरा क्या  कहना,

मुझे दोष ना देना जगवालो,
हो जाऊं आगर मैं दिवाना,
वज्र स बदन,अतुलित बल धामम,

ये अति बलशाली भुजाये तेरी,
कर मे स्वर्ण की है गदा ,
माथे पर सिंदूरी सुरत होठो पर श्रीराम का नाम सदा,
साया भी जो तेरा पड जाये ,
आबाद हो मन का वीराना,
वज्र स बदन, अतुलित बल धामम,

ये विशाल नयन जैसे नील गगन पंछी की तरह खो जाऊं मै,
सहारा हो प्रभु श्री राम का अंगारो पर सो जाऊं मैं,
मेरा बैरागी मन 'डोल उठा,
देखी जो भक्ति 'तेरी हनुमाना,
वज्र सा बदन,अतुलित बल धामम,

तन भी सुंदर ,मन भी सुंदर,
तू उदारता की मुरत हैं,
किसीं और को शायद कम होगी,
श्रीराम को 'तेरी बहुत जरूरत है,
बिन लक्ष्मण के मन तडपा है,
तु शीघ्र ही संजीवन ले आना,
वज्र स बदन, अतुलित बल धामम

हे पवनपुत्र तेरा क्या कहना,
मुझे दोष न देना जगवालो ,
हो जाऊं अगर मे दिवाना,
वज्र स बदन अतुलित बल धामम,

प्रेषक:-
प्रफुल्ल भाऊ
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