नैनन में श्याम समायो

नैनन में श्याम समायो रोग लगाया कान्हा ने,
मैं सुध भुध भूली साऱी रोग लगायो कान्हा ने,
नैनन में श्याम समायो....

जबसे देखि तेरी सूरत दुनिया नजर न आवे,
अधरं में मेरे श्याम श्याम है तू ही प्यास भुजावे,
नैनन में श्याम समायो रोग लगाया कान्हा ने,

तेरी अखियां देर मरी मैं तू कान्हा चित चोर,
तुम को जबसे देखा मैंने ढूंडू मैं चहु और,
नैनन में श्याम समायो रोग लगाया कान्हा ने,

कान्हा ऐसी रेहमत करदो जीवन में प्रकाश हो,
सेलंदर तुमसे बद्लाये पूरी मेरी आस हो,
मेरे जीवन संग प्रकाश चमक चंदा और तारो में,
नैनन में श्याम समायो रोग लगाया कान्हा ने,
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