तेरो लाल चुरावे माखन

तेरो लाल चुरावे माखन,
मैया से बोली ग्वालन,
चिका पे चढ़ के मेरी मटकी फोड़ गई,
कशु खायो कशु बांट गयो सारो माखन और दही रे मइया,
तेरो लाल चुरावे माखन......

तेरो यो कान्हा मैया एसो है चोर निराला,
मौका पड ते ही सारा माखन ये चत कर डाला,
परेशान मैं हुई मेरी मटकी फोड़ गई,
कशु खायो कशु बांट गयो सारो माखन और दही रे मइया,
तेरो लाल चुरावे माखन......

गुस्से में मैया बोली मुझको बतलाओ लाला,
बोलो क्या झूठ कहे है सारी ये ब्रिज की बाला,
बात ये है क्या सही क्या मटकी फोड़ गई,
कशु खायो कशु बांट गयो सारो माखन और दही रे मइया,
तेरो लाल चुरावे माखन......

मैया मैं सुबह सवेरे जाता हु गाये चराने,
आता मैं वहा से कैसे इसका दही माखन खाने,
ना इस के घर गयो न मटकी फोड़ गई,
ना खायो है ना बांटो है मैंने माखन और दही रे मियाँ,
मैंने नही खायो माखन मैया से बोले मोहन

फिर बोले बांके बिहारी तू इनकी चाल ना जाने,
मुझसे मिलने को आती करके कितने बहाने,
अशिर्वाद ले गई शिकायत भी कर गई,
और तुझको माना पता चला ये दर्शन भी कर गई,
मैंने नही खायो माखन मैया से बोले मोहन
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