आज क्या हो गया माँ पापा घर नहीं आये

मन में एक वेचैनी है दिल ये मेरा गबराये,
आज क्या हो गया माँ पापा घर नहीं आये,

पाँव में पायल बिशुया और हाथ का कंगन,
बार बार उठ के माँ तुम्हारा देख न दर्पण,
अब तू शृंगार क्यों नहीं पहले सा करता ही,
सुनी है मांग तेरी फिर से नहीं बरती है,
तुझको क्या हो गया माँ मुझको क्यों न बतलाये,
आज क्या हो गया माँ पापा घर नहीं आये,

बुआ ने राखी का धागा रो रो कर तोड़ दिया,
लौट कर आने की उम्मीद सब ने छोड़ दियां,
भुज गया घर का दीपक दादी कहती है,
बाबा की आंख अनसुइयो से भरी रहती है,
हम सवा लाख का हल पूछने कहा जाये,
आज क्या हो गया माँ पापा घर नहीं आये,

कुछ कहो मत माँ गम तुम्हारा मैं पहचान गया,
देश हिट मर मिटे है पापा मैं ये जान गया,
फिर भी मैं फ़ौज में पड़ा हु दविंदर जाऊ गा,
बदला मैं दुश्मनो के घर में जाके लेके आउगा,
बात कुलदीप दुश्मनो तक पहुंचाए,
आज क्या हो गया माँ पापा घर नहीं आये,
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