ना धन दौलत मांगू न मांगू राज खजाना

ना धन दौलत मांगू न मांगू राज खजाना,
अमृत धुट पीला गंगा माँ चरणों में तेरे ठिकाना,
ना धन दौलत मांगू न मांगू राज खजाना,

कुंभ पर्व है आया माता अमृत जल है तेरा,
सारी दुनिया उमड़ पड़ी है लगा कुंभ का मेला,
मुझपे अपना प्रेम दिखा दो अमृत ध्यानी गंगा माँ,
भव सागर से पार लगा दो जगत तारनी गंगा माँ,
आपने अशीर्वाद मा मुझे पे सदा लूटना,
ना धन दौलत मांगू न मांगू राज खजाना,

सफल हो इस जग में आना माँ सत कर्मो में लगा दे,
पाप शाप अपिशाप मिटा के यश की तीर्थ पैहला दे,
भटक रहे अँधेरे में जो अंतर ज्योति जगा दे माँ,
सब का जीवन पावन करदे भक्तो पे दया दिखा दे माँ,
भक्त जनो को सारे दुखो से माता सदा बचाना
ना धन दौलत मांगू न मांगू राज खजाना,

तू त्रिभुवन की तारनी माता महिमा तेरी अपार है,
भेद भाव न कही कोई जन जन को देती प्यार है,
सब की बिगड़ी बनाने वाली विष्णु पति जग माता है,
कितना भी कोई पापी हो जल से तेरे तर जाता है,
तेरी किरपा से मोक्ष मिले मिट जाए आना जाना,
ना धन दौलत मांगू न मांगू राज खजाना,
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