जयति जयति जय तमसा माता

भुक्ति मुक्ति सुख शांति प्रदायिनी शुभाशीष तब सुयश प्रदाता,
जय तम भंजिनी जन मन रंजिनी जयति जयति जय तमसा माता,
दत्तात्रेय दुर्वाषा को माँ दे तुमने निज आँचल छाया,
अदभुत ज्ञानी विज्ञानी का लगा मुकुट देवर्षि बनाया,
पा तेरा ही सुभाशीष माँ बने चंद्रमा दक्ष चिकित्सक,
किया जिन्होंने सम्पाती को रोग मुक्त इतिहास बताता,
जयति जयति जय तमसा माता,

देवल ऋषि ने भी माँ तमसे तव तट ही आवास बनाया,
हिन्दू धरम सूत्र का जिसने था अभिनव संदेश सुनाया,
रची यहीं थी कण्वाश्रम में शकुंतला की प्रेम कहानी,
पले तुम्हारे ही रक्षण में वीर भरत भारत निर्माता,
जयति जयति जय तमसा माता ..

गुंजी तेरी लहरों में ही सर्वप्रथम कविता की धारा,
बाल्मीकि के माध्यम जिसको माँ वाणी ने स्वयं संवारा,
देवी तुम्हारे आंगन में ही जन्म लिए लवकुश भटमानी,
कालपृष्ठ का अक्षर अक्षर अब भी यह यशगान सुनाता,
जयति जयति जय तमसा माता .....

यहीं तुम्हारे रम्य कुंज में शम्भू सती का ब्याह रचाया,
यहीं नहुष ने सर्प योनि से निज विमुक्ति पूण्य कमाया,
यहीं हुआ था नागवंश के मूल नाश का यज्ञ महत्तर,
आदि असित गंगे माँ तमसे तव पूजन मृदु मंगल दाता,
जयति जयति जय तमसा माता ....

जग को पार लगाने वाले को भी तुमने पार लगाया,
कर्म रथी रह हर संकट में विजय प्राप्ति का पाठ पढ़ाया,
हुआ तुम्हारे परिसर में ही कीचक वध का कृत्य महत्तर,
जिसका ध्रुव संदेश सदा हर दुष्कर्मी है मारा जाता,
जयति जयति जय तमसा माता.....

शिवप्रसाद शर्मा अम्बु को माँ तुमने जो प्यार दिया
नाजिश दिलीप कमलेश का जीवन प्यार से तुमने संवार दिया
रंजन और आलोक को माता ममता और दुलार दिया
शाहे आलम साँवरिया मैया हरदम तेरे ही गुण गाता
जयति जयति जय तमसा माता ..

स्वर - शाह आलम साँवरिया
गीतकार - श्री शिव प्रसाद शर्मा " अम्बु"
संगीत - कमलेश प्रजापति
सहयोग - राजेश रंजन
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