हार तेरा नौलखा मुकट में हीरा कोहिनूर

हार तेरा नौलखा मुकट में हीरा कोहिनूर,
नगीने कुण्डल के हो बाबा बॉम्बे के मशहूर,
ये भागा जयपुर का,

श्याम सोना सोना तुम्हारा ये मुखड़ा,
देख कर लगता है चाँद का है टुकड़ा,
मारे शर्म के तारे सितारे झुकने को मजबूर,
हार तेरा नौलखा मुकट में हीरा कोहिनूर

आज दरबार सजा जैसे कोई जादू से,
छोड़ मंदिर आया ये दूल्हा खाटू से,
लूँ राइ वर्ण नजर लगे गई जरूर,
हार तेरा नौलखा मुकट में हीरा कोहिनूर,

लटकती ऐसे जी गले की हर माला,
शयाम मेरा बैठा हो पहन के वर माला,
ऐसा लगता होगा यह पे शादी का दस्तूर,
हार तेरा नौलखा मुकट में हीरा कोहिनूर

नजारा ऐसे लगे आये दिन फागुन के,
यही दिन वनवारी हो भगतो नाचन के,
नाच नाच कर लूटो लूटो आनंद है भरपूर,
हार तेरा नौलखा मुकट में हीरा कोहिनूर
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