त्रिवेणी में भक्ति भाव से

त्रिवेणी में भक्ति भाव से आकर डुबकी लगाए यो,
महा कुम्ब  में पुण्य कमा कर भाव सागर तर जाये जो,
सब तीर्थ राज चलो पाप अपने सभी धो लो ,
त्रिवेणी में भक्ति भाव से आकर डुबकी लगाए यो,

बाद भारा वर्ष के ये अवसर मिला,
आने वालो का होता यहा पर भला,
पावन जल में यहाँ पर जो अमृत मिला,
उसकी महिमा से दुःख सारा पल में टला,
कष्टों का हो विनाश पापो का सर्वनाश,
सब के मिट ते है दुःख याहा,
सब को मिलता है मोक्ष याहा,
लाख चौरासी कट जाए श्रद्धा से डुबकी लगाए यो,
महा कुंभ में पुण्य कमा कर भव सागर तर जाये जो,
त्रिवेणी में भक्ति भाव से आकर डुबकी लगाए यो,


भाव भक्ति मिली जो यहाँ आया है,
फल कितने ये क्यों क्या याहा पाया है,
पुण्य कितना मिला उसको संसार में,
मुकत अठासी पीडियो को करवाया है,
ऐसी किस्मत खुली साड़ी विपदा टली,
कुंभ में तू डुबकी लगा लक्ष्ये जीवन का तू कर पूरा,
शुद्धि करण को तन मन का कुंभ में आके नहाये जो,
पावन परम में पुण्य कमा कर भव सागर तर जाए जो,
त्रिवेणी में भक्ति भाव से आकर डुबकी लगाए यो,
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