गायत्री मंत्र एवं गायत्री वंदन

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं ।
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

चार वेद ली मातु पुनीता,
तुम ब्रह्माणी गौरी सीता
महामंत्र जितने जग माहि,
कोऊ गायत्री सम नाहिं

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं ।
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

शाश्वत सतोगुणी माँ सतरूपा
सत्य सनातन सुधा अनूपा
हंसारूढ़ श्वेराम्बरधारी
स्वर्ण कांटी शुचि गंगन बिहारी

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं ।
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

सकल सृष्टि की प्राण विधाता
पालक पोषक नाशक त्राता
कामधेनु तुम सुर तरु छाया
निराकार की अद्धभुत माया

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं ।
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

जा पर कृपा तुम्हारी होई
ता पर कृपा करे सब कोई
जयति जयति जगदम्ब भवानी
तुम सम और दयालु ना दानी

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं ।
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

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