शुक्र गुजरा गुरु जी शुक्र गुजरा

पाइया तेरे दर तो मैं रेहमता हज़ारा हां,
शुक्र गुजरा गुरु जी शुक्र गुजरा,

कोडियां दा मूल नहीं सी हीरिया दा पे गया,
जड़ो दा आके गुरु जी मैं चरना च बह गया,
जय जय कारा बोल दियां मन दिया तारा,
शुक्र गुजरा गुरु जी शुक्र गुजरा,


दर दर रुल्दे सा किसे न सम्बलाया,
मेहर किती गुरु जी तू सी गल नल ला लिया,
चंगे वेले सुन लिया साड़ियां पुकारा,
शुक्र गुजरा गुरु जी शुक्र गुजरा,

रेहमता न वेख अखा है पाइया रोन्दियाँ,
की आखा गुरु जी मेतो सिफ़्ता न हुंडिया,
क्यों न गुर जी तूद्दे उतो तन मन वारा,
शुक्र गुजरा गुरु जी शुक्र गुजरा,
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