खाटू के कण कण में विराजे

खाटू के कण कण में विराजे श्याम धनि का ताल,
यही है कलयुग के अवतार,

तींनो बानो की शोभा न्यारी,
प्यारी नीले की असवारी,
मोरछड़ी का झाडाखाके होजा भव से पार,
यही है कलयुग के अवतार,

श्याम कुंड जैसे माँ गंगा,
डुबकी लगा कर हो जा चंगा,
पिछले सारे पाप धुले गे देगा जन्म सुधार,
यही है कलयुग के अवतार,

निजवान जैसी श्याम बगीची,
आलू सिंह जी ने हाथो से सींचि,
इस मिटी का तिलक लगा लो,.
हो गई कभी न हार,
यही है कलयुग के अवतार,

श्याम कहे इक ध्वजा चडालो,
मन चाहा सब प्रभु से पा लो.
गूंज रही सारी दुनिया में इनकी जय जय कार,
यही है कलयुग के अवतार,
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