पाँव में गुंगरू बाँध के छम छम नाच रहे हनुमान

पाँव में गुंगरू बाँध के छम छम नाच रहे हनुमान,
मस्त मलांकड ताल भजावे जपे राम का नाम,

सर सोने का मुकट विराजे गले वैजन्ती माला है,
.हाथ में सोता लाल लंगोटा कैसा रूप निराला है,
तन है लाल सिंधुरी चोला मुख में नागर पान,
पाँव में गुंगरू बाँध के छम छम नाच रहे हनुमान,

सीता बोली रघुवर से बानर मन को भाया है,
ठुमक ठुमक कर इसने मेरा रोम रोम हरषाया है,
हनुमान तुम आज से हो गये मेरे पुत्र सामान,
पाँव में गुंगरू बाँध के छम छम नाच रहे हनुमान,

हनुमान वरदान ये पा कर फुले नहीं समाते है,
ये सब लीला देख राम जी मन ही मन मुस्काते है,
युगल दीनश करे मेरे बाबा रोज तेरा गुणगान,
पाँव में गुंगरू बाँध के छम छम नाच रहे हनुमान,
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