ना डोर लगी न खम्बा झूला झूल रही अम्बा

ना डोर लगी न खम्बा झूला झूल रही अम्बा,
तीन लोक में गह्यो अचमबा घयो रे अचम्बा,

बरसे मेगना चली पवन चमके तारे नील गगन,
इन्दर देव का भयो अचम्बा भयो रे अचम्बा रे अचम्बा,
ना डोर लगी न खम्बा झूला झूल रही अम्बा,

ब्रह्मा भूले वेद पठन नारद  भूले नारायण,
विष्णु जी को भयो अचम्बा,
भयो रे अचम्बा,
ना डोर लगी न खम्बा झूला झूल रही अम्बा,

हनुमत भूले राम भजन भूल गये शिव ॐ रतन,
सबके देवो को भयो अचम्बा,
ना डोर लगी न खम्बा झूला झूल रही अम्बा,
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