ऐसो चटक मटक सो ठाकुर

ऐसो चटक मटक सो ठाकुर, तीनो लोकोनहु में नाहे

तीन ठौर ते टेढ़ो दिखे
नट किसी चलगत यह सीखे
टेढ़े नैन चलावे तीखे
सब देवन को देव
तोउ ये ब्रज में घेरे गाये

ब्रह्मा मोह कियो पछतायो
दर्शन को शिव ब्रज में आयो
मान इन्द्र को दूर भगाओ
ऐसो वैभव वारो, तोउ ये ब्रज में गारी  खाए

बड़े बड़े असुरन को मारयो
नाग कालिया पकड़ पछड़ेओ
सात दिना तक गिरिवर धारयो
ऐसो बलि तौऊ खेलत में ग्वालन पे पिट जाए

रूप छबीलो है ब्रज सुन्दर
बिना बुलाए डोले घर घर
प्रेमी ब्रज गोपिन को चाकर
ऐसो प्रेम बडेओ माखन की चोरी करवे जाए
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