पर्वत ज्योति लहराई

पर्वत ज्योति लहराई,जै हो तेरी ज्वाला माई
तू सबके मन को भायी ,जै हो तेरी ज्वाला माई,

धरती से निकली ज्वाला,भक्तो पे जादू डाला,
पवन चले या पुरवाही,जै हो तेरी ज्वाला माई,

तेरे भवन पर मेले हैं,भक्त तेरे अलबेले हैं,
तूने लीला दिखलाई ,जै हो तेरी ज्वाला मैं,

तू गुल मे गुल्ज़ारो मे,तू रंगीन बहारो मे ,
ये दुनिया तूने महकाई,जै हो तेरी ज्वाला माई,

ये पलक जपे तेरी माला,माँ कर जीवन मे उजियारा,
तू सबके मन को भई,जै हो तेरी ज्वाला माई.
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