हद होती है श्याम अब तो आज़माने की

हद होती है श्याम अब तो आज़माने की,
जान ही लोगे क्या बाबा तेरे दीवाने की,
हद होती है श्याम...

इक तो पहले ही ज़माने का सताया हु मैं,
उसपे गम तेरी जुदाई का दे दिया तूने,
क्या खता है मेरी मुझको ये बताओ बाबा,
क्यों मेरे प्यार का एहसास याद दिया तूने,
हद होती है श्याम...

मैं नहीं कहता मुझे चाँद सितारे दे दे,
ना ही कहता मुझे गुलशन की बहारे दे दे,
मैं तो मांगू वही जो चाह है हारने वाला,
मेरा तो साथ तू हारे के सहारे दे दे,
हद होती है श्याम....

जीतने वालो के जितने भी इम्तेहा लेले.
हारने वालो के दिल से तू श्याम क्यों खेले,
सोनू बतला भी दे हम जैसे बेसरो की दुभ ती कश्तियाँ तूफ़ान को कैसे जिले,
हद होती है श्याम....
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