महोबत तुमसे की मोहन

महोबत तुमसे की मोहन ज़माने को भुला बैठे,
न अपना कुछ रहा मुझमे तुम्ही पे सब लुटा बैठे,

तेरी यादो के साये में मेरे आंसू झलक ते है,
निकल ता दम न जाने क्यों यही फर्याद करते है,
की आजा तू मेरे मोहन तुम्हे अपना बना बैठे,
न अपना कुछ रहा मुझमे तुम्ही पे सब लुटा बैठे,

ये दुनिया है मेरी वीरान ना कोई दर्द को जाने,
मेरी आहो को  सुन प्यारे हुआ क्या हाल तू जाने,
मैंने तेरी हु तू मेरा है तुम्हे दिल में वसा बैठे,
न अपना कुछ रहा मुझमे तुम्ही पे सब लुटा बैठे,

तू दुःख दे दे या सुख दे दे हमे मंजूर सब तेरा,
मेरा तो कृष्ण ही जीवन है अब तो श्याम ही मेरा,
पतित पावन हो तुम कान्हा तुमि को सिर झुका बैठे,
न अपना कुछ रहा मुझमे तुम्ही पे सब लुटा बैठे,

लगी दिल की बुरी होती किसी से प्रेम होता है,
वो दुनिया से बेगाना है यु ही दिन रात रोता है
ना जीते है ना मरते है तुम्हे दिल में छुपा बैठे,
न अपना कुछ रहा मुझमे तुम्ही पे सब लुटा बैठे,
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