क्या खेल रचाया है

क्या खेल रचाया है,
तूने खाटू नगरी में बैकुंठ बसाया है,

कहता जग सारा है,
मोरछड़ी वाला हारे का सहारा है.
क्या प्रेम लुटाया है,
कर्मा का खीचड़ दोनों हाथ से खाया है,

दर आये जो सवाली है,
तूने सबकी अर्जी सुनी कोई लोटा न खाली है,
कोई वीर नशानी का घर घर डंका भजता,
बाबा शीश के दानी का,

तेरी जोत नूरानी का,
क्या अज़ाब करिश्मा है,
श्याम कुंड के पानी का
नहीं पल की देर करि,
जो आया शरण तेरी तूने उसकी विपद हरी,
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