श्याम मेरे दौड़े आते है

अपने भक्त की आँख में आंसू देख न पाते है ,
कन्हैया दौड़े आते है श्याम मेरे दौड़े आते है,

जहाँ में शोर ऐसा नहीं कोई श्याम जैसा,
जहाँ के मालिक  है ये सबो से वाकिफ है ये,
धर्म पता का निज हाथो से तब फहराते है,
श्याम मेरे दौड़े आते है...

गए जो भूल इनको धीर नहीं उनके मन को,
तिजोरी लाख भरी हो मोटरे महल खड़ी हो,
हीरे मोती से मेरे भगवन नहीं ललचाते है,
श्याम मेरे दौड़े आते है......

याद कर ग़ज की गाथा पाठ के रथ को हांका,
दीं पांचाली हारी वड़ा दी उसकी साड़ी,
धुरव नरसी प्रहलाद और मीरा टेर लगते है,
श्याम मेरे दौड़े आते है.......

प्रभु से मिलना चाहो प्रेम से हरी गुण गाओ,
बनो श्री श्याम दीवाना प्रेम प्रभु का जो पाना,
नंदू भगवान भक्त के सब काम पटाते है,
श्याम मेरे दौड़े आते है
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