बुढापा बेरी काहे को आ गयो रे

बुढापा बेरी काहे को आ गयो रे,
मोहे राम नाम मन भाए गयो रे,
बुढापा बेरी....

बचपन बीता खेलन में,माया लिपट गई जीवन मे,
बुढापा पछताने को आ गयो रे,
मोहे राम नाम मन भाए गयो रे,
बुढापा बेरी काहे......

कंचन काया खूब सजाइ,
तेल फूल मैने खूब लगाया,
मेरे नस नस में रोग समाय गयो रे,
मोहे राम नाम मन भाए गयो रे,
बुढापा बेरी काहे........

पहले दूध पीया बचपन मे,
माल मिठाई खाई भर यौवनं में,
बुढापा कड्वी दवाई पीलाय गयो रे,
मोहे राम नाम मन भाए गयो रे,
बुढापा बेरी काहे....

पहले तो है गोद मे आसन,
भर यौवन में ऊचा सिंहासन,
बुढापा पोली में सुला गयो रे,
मोहे राम नाम मन भाए गयो रे,
बुढापा बेरी काहे.....

पाप पूण्य की बाँधे गठरीया,
प्रेम से चले हे अपनी डगरिया,
बुढापा मेरे ऊपर आ गयो री,
हाथ मेरे लठिया थमा गयो रे,
मोहे राम नाम मन भाए गयो रे,
बुढापा बेरी काहे.......

मोह माया में मन मेरो उलझो,
चौरासी में मोहे फ़सावे,
पाप ताप में मोहे फ़सावे,
जन्म मरण में मोहे गिरावे,
मेरे गुरु ने आके मोहे थाम लीयो रे,
मेरे गुरु ने पार  मोहे लगा दियो रे,
मोहे राम नाम मन भाए गयो रे,
बुढापा बेरी काहे......
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