तू ही ईश्वर तू अल्ल्हा तू रब शिरडी वाले

तेरी मस्जिदे है तेरे है शिवाले,
तू ही ईश्वर तू अल्ल्हा तू रब शिरडी वाले,
तू मालिक है सबका तू ही सबको पाले,

सभी के लिए है तेरी धुप छाओ,
ये काशी वो कावा है सब तेरे गाँव,
तू धर्मो के बंधन से बिलकुल परे है,
कर्म हिन्दू मुश्लिम सभी पे करे है,
सभी को गमो के ववर से निकले,
तू ही ईश्वर तू अल्ल्हा तू रब शिरडी वाले,

खुदा कोई बोले कहे कोई दाता,
है तेरा तो सारे ज़माने से नाता,
तुझे गैर भी न लगे गैर बाबा,
तू मांगे है सबके लिए खैर बाबा,
तू देता ही देता है कुछ हम से ना ले,
तू ही ईश्वर तू अल्ल्हा तू रब शिरडी वाले,

तू मोहन की मूरत मैं भी दे दिखाई,
अजानो से भी तेरी आवाज आई,
है गीता में उपदेश तेरा ओ साई,
तू गुरवा के कलमो में देता सुनाई,
तुजो चाहे वो रूप पल में बना ले,
तू ही ईश्वर तू अल्ल्हा तू रब शिरडी वाले,
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