अंजनी के दुलारे

झूम रहे अनजान प्रदेश के नर नारी सब सारे,
आज अनजान के घर जनम लियो माता अंजनी के दुलारे,

चतिर मॉस के शुकल पक्ष है चित्रणा छतर है पाडी,
मंगल के दाता है प्रभु मंगल सुबह दिन घडी,
मारुती जो नाम पड़ा है है जग के उझारे
आज अनजान के घर जनम लियो माता अंजनी के दुलारे,

स्वर्ग से देवता सभी फूल को बरसते है,
नारद मुनि वीणा लेकर प्रभु की कीर्ति गाते है,
पाप दुःख सब हरने वाले,है बाबा भाव तारी,
आज अनजान के घर जनम लियो माता अंजनी के दुलारे,

केसर का दरबार खुला है प्रजा मन हर्षाते,
ओन आभूषण हीरा जवरहर सब बदहियँ पाते,
संत से राहुल संजय आरती प्रभु के उतरे,
आज अनजान के घर जनम लियो माता अंजनी के दुलारे,