मोरी अखियां तरस रही है

यमुना किनारे राधा तेरी कर रही इंतज़ार रे,
मोरी अखियां तरस रही है दिल चाहता है देदार वे,

ओ लाडू वाला तू है नन्द जी का लाला,
बांसुरी वाला तू है कला दिल वाला,
तू है छलिया चितचोर है तू,
बड़ी नटखट माखन चोर है तू,
प्रीत की प्यासी दर्श अभिलाषी हो रही बेकरार मैं,
मोरी अखियां तरस रही है दिल चाहता है देदार वे,

मुझपे कान्हा ओ थोड़ा तरस तो खाना,
पॉ पडू मैं तोरी नहीं इतना सताना,
आजा आजा करू अब नहीं देर,
कान्हा सुन लो मोरी मनवा की तेर,
तेरे सिवा मेरा कौन है दूजा तू है प्राण उधार रे,
खुशबु तिवारी तेरी शरण में आये बाराम बार रे,
मोरी अखियां तरस रही है दिल चाहता है देदार वे,
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