साई क्या करू तारीफ तेरी

साई क्या करू तारीफ तेरी,
तू ही दीखता हर मंजर में इस ज़मी उस एम्बर में,
साई तू साई तू
साई क्या करू तारीफ तेरी....

मेरी हर इबादत में तू अर्जु में तुम ही तुम,
मेरे दिल की हर धरकन में यु बसे हो तुम ही तुम,
तेरे बिना तो कुछ भी नहीं मैं दुनिया सबकी मेरा तू,
साई तू साई तू,
साई क्या करू तारीफ तेरी....


तेरी शान तो सबसे आली बस तू ही एक नेक है,
तेरा कहना मैं कहता हु सबकस मालिक एक है,
मेरा मौला मेरा साई बन गया है तू ही तू,
साई तू साई तू,
साई क्या करू तारीफ तेरी

मेरे हर अल्फाजो में तुम मेरे हर खाबो में तुम,
चाहु कर्म बस इतना साई कभी जुदा ना होना तुम,
जबसे आया तेरी शिरडी मेरी हर सांसो में तू,
साई तू साई तू
साई क्या करू तारीफ तेरी.....
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